शास्त्रीय नृत्य के कलाकार 2024 | Classical Dance and Players GK Questions Hindi Free PDF

भारत के शास्त्रीय नृत्य व सम्बंधित कलाकार

Classical Dance of India and related Dancer – नमस्कार दोस्तों KV Guruji पर आप सभी का स्वागत है| इस आर्टिकल में विभिन्न परीक्षाओ के दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण Static GK के टॉपिक “भारत के शास्त्रीय नृत्य व उसके कलाकार” (Classical Dance and their players) से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ इस टॉपिक से पूछे गए प्रश्नों को साझा किया गया है| तो अगर आप SSC CGL या SSC के अन्य किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं तो इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़िए|

Dance in India

Dance in India – भारत देश में प्राचीन समय से ही नृत्य की एक समृद्ध व प्राचीन परम्परा रही है| प्राचीन समय के शिलालेखों, साहित्यिक स्त्रोतों, मूर्तिकला, चित्रकला, ऐतिहासिक वर्णनों, व खुदाई से भारत में नृत्य के व्यापक पैमाने पर प्रमाण प्राप्त हुए हैं| भारत में प्रमुख तौर पर दो प्रकार के नृत्य किये जाते है|

  1. शास्त्रीय नृत्य
  2. लोकनृत्य

भारत के लोक नृत्य के बारे में इससे पहले के आर्टिकल में हम पढ़ चुके हैं|

जरुर पढ़िए – संगीत वाद्य यंत्र व वादक SSC CGL PDF

What is Classical Dance?

Classical Dance – शास्त्रीय नृत्य भगवान, देवी-देवता व धार्मिक शास्त्रों के पात्रों का वर्णन करने वाले नृत्य का रूप होता है|

  • भारत में 12वीं से 19वीं शताब्दी के मध्य संगीत नाटक से ही शास्त्रीय नृत्य का विकास हुआ|
  • शास्त्रीय नृत्यों के बारे में पहला उल्लेख भरतमुनि द्वारा लिखित नाट्यशास्त्र में मिलता है|

नृत्य शास्त्र के अनुसार शास्त्रीय नृत्य के दो आयाम होते हैं|

  • लस्य – भाव, रस व अभिनय का प्रतीक है तथा स्त्री प्रधान होता है|
  • तांडव – लय व गति पर फोकस करता है तथा पुरुष प्रधान होता है|

List of classical dance in India

Classical Dance of India – संगीत नाटक अकादमी द्वारा भारत के कुल 8 नृत्यों को शास्त्रीय नृत्य का दर्जा प्राप्त है, जिनके नाम व सम्बंधित राज्य का नाम निम्न सारणी में दिया गया है|

क्र. सं.शास्त्रीय नृत्य का नामसम्बंधित राज्य
1.भरतनाट्यमतमिलनाडु
2.मोहिनीयट्टमकेरल
3.कथकलीकेरल
4.कुचिपुड़ीआन्ध्र प्रदेश
5.कत्थकउत्तर प्रदेश
6.सतरियाअसम
7.ओडिसीओडिशा
8.मणिपुरीमणिपुर

नोट – भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने भारत में कुल 9 नृत्य को शास्त्रीय नृत्य का दर्जा दिया है| उपर्युक्त 8 नृत्य के अलावा झारखण्ड, पश्चिम बंगाल व ओडिशा के छौ नृत्य को भी शास्त्रीय नृत्य का दर्जा प्राप्त है|

8 Classical Dance of India Map PDF
8 Classical Dance of India Map PDF

Bharatanatyam Classical Dance

Bharatanatyam Classical Dance – भरतनाट्यम सभी शास्त्रीय नृत्यों में सबसे प्राचीन है तथा इसका विकास तमिलनाडु राज्य के मंदिरों से हुआ है| यह मंदिरों में देवदासियों द्वारा की जाने वाली नृत्य कला से उत्पन्न हुआ|

  • नंदीकेश्वर द्वारा लिखित अभिनव दर्पण व नाट्यशास्त्र, भरतनाट्यम के अध्ययन का मुख्य स्त्रोत है|
  • यह एकल नृत्य का एक प्रकार है तथा नर्तक द्वारा एकल प्रदर्शन में कई भूमिकाएं (एकाहार) निभाई जाती हैं|
  • स्वतंत्रता सेनानी ई कृष्ण अय्यर ने भरतनाट्यम को पुनः जीवित करने में योगदान दिया तथा रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा इसे वैश्विक पहचान दिलाई गई|
  • भरतनाट्यम नृत्य मानवीय व ईश्वरीय प्रेम जैसे विषयों को समाहित करती है तथा कर्नाटक संगीत के ऊपर अभिनय किया जाता है|
  • भरतनाट्यम नृत्य में एक नट्टूवनर होता है जोकि नृत्य करने वाले नर्तक को निर्देशित करता है|

भरतनाट्यम के प्रसिद्ध नर्तक

  • मल्लिका साराभाई, लक्ष्मी विश्वनाथन, रुक्मिणी देवी अरुंडेल, सोनल मानसिंह, यामिनी कृष्णमूर्ति, प्रतिभा प्रहलाद, मृणालिनी साराभाई व पद्म सुब्रमण्यम, बी हेरम्बनाथन, मीनाक्षी श्रीनिवासन, बालासरस्वती आदि|

Mohiniyattam Classical Dance

Mohiniyattam Classical Dance – मोहिनीयट्टम नृत्य केरल राज्य से सम्बंधित एक शास्त्रीय नृत्य है| यह नृत्य भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार पर आधारित है|

  • मोहिनीयट्टम नृत्य का मुख्य स्त्रोत 16वीं शताब्दी में माजामंगलम नारायण नम्बूदिरी द्वारा लिखित व्यवहार माला है|
  • मोहिनीयट्टम महिलाओ द्वारा किया जाना वाला एकल नृत्य का प्रकार है तथा नृत्य में लस्य शैली का प्रयोग किया जाता है|
  • मलयालम कवि वी एन मेनन द्वारा कल्याणी अम्मा के साथ मिलकर पुनर्जीवित किया गया
  • कार्नेटिक स्टाइल के संगीत के साथ मणिप्रवलम भाषा (संस्कृत + मलयालम) में गीत पर इस नृत्य पर परफॉर्म किया जाता है|

मोहिनीयट्टम नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • जयप्रभा मेनन, कलामंडलम, डॉ सुनंदा नायर, माधुरी अम्मा, K क्षमावती आदि|

Kathakali Classical Dance

Kathakali Classical Dance – कथकली केरल राज्य का शास्त्रीय नृत्य है|

  • रामनत्तम, कुडियायट्टम व कृष्णत्तम नृत्यों से मिलकर कथकली शास्त्रीय का उद्भव हुआ है तथा यह नृत्य रामायण, महाभारत व पुराण की कहानियों पर आधारित होता है|
  • वर्ष 1930 में कवि एन मेनन को कथकली नृत्य को पुनर्जीवित करने का श्रेय दिया जाता है|
  • मोहिनीअट्टम की तरह ही कार्नेटिक स्टाइल के संगीत के साथ मणिप्रवलम भाषा (संस्कृत + मलयालम) में गीत पर इस नृत्य पर परफॉर्म किया जाता है|
  • कथकली नृत्य के दौरान अभिनयकर्ता बिल्कुल चुप रहते हैं और चेहरे की भाव भंगिमाओं व हाथ की विभिन्न अवस्थाओं के द्वारा कहानी को पेश करते हैं|
  • कथकली आकाश तत्व का प्रतीक है तथापुरुषों के द्वारा समूह में किया जाने वाला नृत्य है|

कथकली नृत्य के प्रसिद्ध नर्तक

  • रीता गांगुली, गोपी नाथ, कोट्टाकल शिवरामन, गुरु कुँचु कुर्प आदि|

Kuchipudi Classical Dance

Kuchipudi Classical Dance – कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य का उद्भव आन्ध्र प्रदेश राज्य के कृष्णा जिले में हुआ था|

  • कुसलवस समूह (ब्राह्मण समूह) के पुरुषों द्वारा गाँव-गाँव जाकर कुचिपुड़ी नृत्य का अभिनय किया जाता था तथा इन ब्राह्मण परिवारों को भागवतथालु कहा जाता था|
  • 17वीं शताब्दी में तीर्थ नारायण यति व उनके शिष्य सिद्धेन्द्र योगी द्वारा कुचिपुड़ी नृत्य को व्यवस्थित रूप में विकसित किया गया था|
  • आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के कुचेलपुरम गाँव पर इस नृत्य का नाम रखा गया है|
  • भागवत पुराण की कहानियों पर आधारित होता है तथा नृत्यकर्ता पीतल की थाली पर पैर रख करके सिर पर पानी का कलश रखकर नृत्य करते हैं|
  • बालसरस्वती व रागिनी देवी का इसे पुनर्जीवित करने में योगदान दिया|

कुचिपुड़ी नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • सिद्धेन्द्र योगी, राजा रेड्डी, राधा रेड्डी, इन्द्राणी रहमान व यामिनी कृष्णमूर्ति, अपर्णा सतीशन हलीम खान आदि|

Kathak Classical Dance

Kathak Classical Dance – कत्थक उत्तर भारत विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य में किया जाने वाला नृत्य है|

  • कत्थक नृत्य का सम्बन्ध कथा वाचकों से है और ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों की कहानियों को संगीत के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से कत्थक शास्त्रीय नृत्य का प्रादुर्भाव हुआ|
  • 15वीं व 16वीं शताब्दी में भक्ति आन्दोलन के समय प्रसार हुआ था तथा राधा-कृष्ण की कहानियों को नृत्य के माध्यम से दिखाया जाता था|
  • 20वीं शताब्दी में लीला सोखी द्वारा पुनर्जीवित किया था|
  • कत्थक भारत का एकमात्र नृत्य है जोकि हिन्दू व मुस्लिम कला के एक अद्वितीय संश्लेषण का प्रतिनिधित्व करता है|

कत्थक के प्रमुख घराने

  • बनारस घराना – जानकी प्रसाद, सितारा देवी
  • रायगढ़ घराना – राजा चक्रधर सिंह
  • लखनऊ घराना – ईश्वरी प्रसाद, नवाब वाजिद अली शाह, लच्छु महराज, बिरजू महराज, सुष्मिता बनर्जी
  • जयपुर घराना – भानुजी, कानूजी, हरी प्रसाद

कत्थक शास्त्रीय नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • पंडित बिरजू महराज, लच्छु महराज, शम्भू महराज,  सितारा देवी, शोवना नारायण, शर्मीला शर्मा व राजेंद्र गंगानी, रोहिणी भाटे आदि

Sattriya Classical Dance

Sattriya Classical Dance – वैष्णव संत शंकरदेव द्वारा 15वीं शताब्दी में असम के सत्तराओ (मठों) में इस नृत्य की शुरुआत किया गया|

  • भक्ति आन्दोलन से प्रेरित यह नृत्य भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित था|
  • सतरिया शास्त्रीय नृत्य हस्त भाषा, पाद कर्म, नृत्य व अभिनय पर आधारित है तथा वर्तमान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं द्वारा भी किया जाता है|
  • सतरिया नृत्य को वर्ष 2000 में शास्त्रीय नृत्य का दर्जा दिया गया था|

सतरिया शास्त्रीय नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • जतिन गोस्वामी, श्रीमंत शंकरदेव, मधुस्मिता बोरा आदि

Odissi Classical Dance

Odissi Classical Dance – ओडिशी शास्त्रीय नृत्य का उद्भव ओडिशा राज्य के मंदिरों में नृत्य करने वाली देवदासियों के नृत्य से हुआ था|

  • ओडिशी शास्त्रीय नृत्य का उल्लेख भरत मुनि द्वारा लिखित नाट्यशास्त्र में भी मिलता है तथा ब्रह्मेश्वर मंदिर के शिलालेखों व कोणार्क सूर्य मंदिर के केन्द्रीय कक्ष में भी इस नृत्य को दर्शाया गया है|
  • ओडिशी नृत्य नाट्यशास्त्र में उल्लेखित ओड्रा नृत्य पर आधारित तथा शास्त्रीय संगीत के साथ भगवान कृष्ण, राधा, भगवान शिव व सूर्य की कथाओं पर परफॉर्म किया जाता है|
  • चार्ल्स फैबरी व इन्द्राणी रहमान को ओडिसी शास्त्रीय नृत्य को पुनर्जीवित करने का श्रेय दिया जाता है|
  • युवा लड़कों द्वारा महिलाओ के कपडे के साथ प्रदर्शित किया जाता है तथा उड़िया साहित्य व गीत गोविन्द पर अभिनय आधारित है|

ओडिसी शास्त्रीय नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • पंकज चरण दास, सोनल मानसिंह, मिनाती मिश्रा, केलु चरण मोहपात्र, शर्मीला विश्वास, सुजाता मोहपात्रा, माधवी मुदगल, गुरु गंगाधर प्रधान

Manipuri Classical Dance

Manipuri Classical Dance – मणिपुर राज्य में शिव व पार्वती के पौराणिक कथाओ पर आधारित है तथा मणिपुरी नृत्य लाई हरोबा त्यौहार से संबंधित है|

  • शुरुआत में यह नृत्य माईबा व माबी द्वारा विश्व के निर्माण के विषय पर यह नृत्य आधारित था जोकि बाद में भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित कहानियों पर परफॉर्म किया जाने लगा|
  • रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा शांति निकेतन में नृत्य की प्रदर्शनी का आयोजन कराया गया था|
  • मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य को जगोई के नाम से भी जानते हैं|

मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य के प्रमुख नर्तक

  • चार झवेरी बहनें [दर्शाना, रंजना, नयना व सुवर्णा], निर्मला मेहता, सविता मेहता, कलाबती देवी, गुरु हरिचरण सिंह, गुरु चंद्रकांता सिन्हा, बिभोती देवी, अम्बात सिंह तथा गुरु बिपिन सिंह आदि|

इस आर्टिकल में भारत के सभी शास्त्रीय नृत्य व उससे सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को डिस्कस कर लिया है| आशा करते हैं कि यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा|

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